मेरठ;अंबेडकरवाद पर बड़ा बयान: जुलूस-डीजे नहीं, 22 प्रतिज्ञाएं अपनाने से बनते हैं सच्चे अनुयायीTv92News

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मेरठ;अंबेडकरवाद पर बड़ा बयान: जुलूस-डीजे नहीं, 22 प्रतिज्ञाएं अपनाने से बनते हैं सच्चे अनुयायीTv92News

पत्रकार : अनीस सैफी

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मेरठ: मुक्ति पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजुद्दीन गादरे ने अंबेडकरवादी विचारधारा को लेकर एक बड़ा और अहम बयान दिया है, जिसमें उन्होंने समाज को आत्ममंथन करने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में अंबेडकरवाद के नाम पर केवल दिखावा ज्यादा हो रहा है, जबकि असल में उसके मूल सिद्धांतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिर्फ जुलूस निकालने, डीजे बजाने, बैनर-पोस्टर लगाने या सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से कोई व्यक्ति सच्चा अंबेडकरवादी नहीं बन सकता। सच्चा अनुयायी वही है, जो डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा बताई गई 22 प्रतिज्ञाओं को अपने जीवन में पूरी निष्ठा के साथ अपनाता है और उन्हें व्यवहार में लाता है।
गादरे ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का पूरा जीवन सामाजिक न्याय, समानता और वैज्ञानिक सोच पर आधारित रहा है। ऐसे में अगर उनके अनुयायी केवल औपचारिकताओं तक सीमित रहेंगे, तो समाज में वास्तविक बदलाव संभव नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि अंबेडकरवादी बनने का मतलब है—अपने विचारों, व्यवहार और जीवनशैली में बदलाव लाना।
उन्होंने समाज में फैले अंधविश्वास, पाखंड और मनुवादी सोच को देश और समाज की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बताया। उनका कहना था कि जब तक बहुजन समाज इन कुरीतियों से बाहर नहीं निकलेगा, तब तक वह अपने अधिकारों और विकास के रास्ते पर पूरी मजबूती से आगे नहीं बढ़ पाएगा।
इस दौरान उन्होंने बहुजन समाज से आह्वान करते हुए कहा कि वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं और भारतीय संविधान के मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक किताब नहीं, बल्कि यह समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे का मार्गदर्शक है, जिसे हर नागरिक को समझना और अपनाना चाहिए।
गादरे ने आगे कहा कि समाज को महापुरुषों के विचारों को केवल पढ़ने या सुनने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें अपने दैनिक जीवन में उतारना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर लोग सच में बदलाव चाहते हैं, तो उन्हें अपने व्यवहार में सुधार करना होगा और समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना होगा।
उन्होंने गौतम बुद्ध, ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले और कांशीराम जैसे महान विचारकों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन सभी ने अपने जीवन में समाज सुधार और समानता के लिए संघर्ष किया। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और उन्हें अपनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
अंत में उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि लोग दिखावे से बाहर निकलकर वास्तविक अंबेडकरवाद को समझें और उसे अपने जीवन में उतारें। तभी समाज में सही मायनों में जागरूकता और परिवर्तन देखने को मिलेगा।

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