आगरा भीमनगरी में 101 जोड़ों का बौद्ध रीति से सामूहिक विवाह, सामाजिक एकता का दिखा अद्भुत दृश्य
आगरा के ग्यासपुरा क्षेत्र में आयोजित भीमनगरी समारोह के दूसरे दिन गुरुवार को 101 जोड़ों का बौद्ध रीति-रिवाजों के अनुसार दहेज रहित सामूहिक विवाह संपन्न हुआ। इस अवसर पर पूरा मैदान वैवाहिक उत्सव और सामाजिक समरसता के रंग में रंगा नजर आया।
कार्यक्रम की शुरुआत “बुद्धम शरणम् गच्छामि” के पवित्र स्वर के साथ हुई। इसके बाद बौद्ध भिक्षुओं—भंते बोधिरत्न, धम्म दीप, अशोक रत्न और उंगलीमाल—ने विवाह की सभी धार्मिक रस्में संपन्न कराईं। जयपुर हाउस चौकी क्षेत्र से 101 दूल्हे घोड़े पर सवार होकर बैंड-बाजे के साथ जीआईसी मैदान पहुंचे, जहां चक्रवर्ती सम्राट अशोक महल के स्वरूप में सजे मंच पर विवाह समारोह आयोजित किया गया।
भीमनगरी आयोजन समिति के अध्यक्ष सुभाष सागर ने बताया कि यह आयोजन पूरी तरह बौद्ध रीति-रिवाज और सामाजिक समरसता पर आधारित रहा, जिसमें विभिन्न धर्मों और जातियों के लोगों ने सहभागिता की।
संयोजक राहुल सागर के अनुसार नवविवाहित जोड़ों को किचन सेट, डिनर सेट, कूकर, सीलिंग फैन, वॉटर कूलर, दीवार घड़ी और नगद राशि सहित कई उपहार दानदाताओं द्वारा प्रदान किए गए।
इस अवसर पर हजारों की संख्या में आगरा देहात और शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ दूर-दराज से आए लोगों ने समारोह में भाग लिया। मंच पर 101 दुल्हनों ने लाल जोड़े में अपने जीवनसाथी का हाथ थामा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
कार्यक्रम में लोक गायक अनुज जाटव पियावली ने “यूपी में आ जा जाटवनी”, “रविदास है हम”, “जाटव यूपी का राजा” जैसे गीतों से समां बांध दिया।
आयोजन समिति ने घोषणा की कि अंतिम दिन मेधावी छात्रों और समाज के प्रतिभाशाली व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा। वहीं इंडियन आइडल फेम श्रेया वर्मा और श्रृष्टि सरगम भी प्रस्तुति देंगी।
चंद्रशेखर आजाद का संबोधन
कार्यक्रम में आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी शिरकत की और समाज को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आगरा की पहचान विश्व में ताजमहल से है, लेकिन उनके लिए भीमनगरी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में ज्ञान के प्रतीक हैं। उनके विचारों को पढ़ने और अपनाने की आवश्यकता है, न कि केवल पूजने की।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि बाबा साहेब आज भी समाज के संघर्ष और अधिकारों की लड़ाई में जीवित हैं, और उनके विचारों को पहले उत्तर प्रदेश और फिर पूरे देश में आगे बढ़ाना होगा।
उन्होंने नगर निगम द्वारा लगाए गए टैक्स के मुद्दे पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि छोटे उद्योगों और कारीगरों पर किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भीमनगरी बनी सामाजिक एकता का प्रतीक
महासचिव श्याम जरारी ने बताया कि 1996 से अब तक भीमनगरी में हजारों सामूहिक विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं, जिनका उद्देश्य दहेज प्रथा का अंत और सामाजिक समानता को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम में जय भीम और जय संविधान के नारों से पूरा मैदान गूंज उठा।
निष्कर्ष
भीमनगरी समारोह एक बार फिर सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विविधता और बौद्ध रीति-रिवाजों के साथ दहेज रहित विवाह का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है। हजारों लोगों की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।


