जटिलताओं से जूझ रहे शिशुओं का हो रहा आधुनिक तकनीक से उपचार – अलीगढ़ सहित आसपास के जनपदों से रेफर नवजात शिशुओं को भी मिल रहा उपचार Tv92News

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  1. नवजात की जान बचाने में वरदान साबित हो रहा एसएनसीयू
    – एमएलजी जिला महिला अस्पताल में स्थापित एसएनसीयू में जटिलताओं से जूझ रहे शिशुओं का हो रहा आधुनिक तकनीक से उपचार
    – अलीगढ़ सहित आसपास के जनपदों से रेफर नवजात शिशुओं को भी मिल रहा उपचार
    अलीगढ़,19 फरवरी 2026
    मोहन लाल गौतम (एमएलजी) राजकीय महिला अस्पताल स्थित सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) अलीगढ़ और आसपास के जनपदों में नवजात मृत्यु दर को कम करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां पर समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले, या जटिलताओं से ग्रस्त शिशुओं को आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ देखभाल के माध्यम से जीवनदान दे रहे हैं।

कासगंज के ग्राम हर्राजपुर निवासी अंकित कुमार बताते हैं कि उनकी पत्नी का निजी अस्पताल में प्रसव हुआ। बच्चे का वजन काफी कम था, निजी अस्पताल में देखभाल नहीं हो पा रही थी, खर्चा भी काफी ज्यादा था, तब किसी ने बताया कि एमएलजी राजकीय महिला अस्पताल चले जाओ वहां पर अच्छी सुविधा हैं, यहां पर बच्चे को विशेषज्ञ चिकित्सकों ने देखा और एसएनसीयू में भर्ती कर लिया। यहां पर बच्चे का शीघ्र और बेहतर उपचार किया गया, बच्चा अब पूरी तरह से स्वस्थ है। एसएनसीयू अलीगढ़ और आसपास के जनपदों के लिए वरदान की तरह है।

ग्राम परौरा अलीगढ़ निवासी मनोज कुमार बताते हैं कि 05 जनवरी 2026 को उनकी पत्नी ने निजी अस्पताल में प्रसव के उपरांत जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। दोनों नवजात का वजन कम था, पहले बच्चे का वजन 1.7 किलोग्राम और दूसरे बच्चे 1.8 किलोग्राम वजन था। डॉक्टर ने मशीन पर रखने की सलाह दी, जिसका खर्चा काफी अधिक था और स्टाफ का व्यवहार भी अच्छा नहीं था। ऐसे में जब हमारे क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता उर्मिला ने हमें एसएनसीयू की जानकारी दी और वहां आधुनिक सुविधाओं के बारे में बताया। इसके बाद हमने दोनों शिशुओं को यहां पर लाकर भर्ती कर दिया। विशेषज्ञ चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ ने उनका उपचार किया। एसएनसीयू में विशेषज्ञों द्वारा कंगारू मदर केयर के बारे में बताया गया और मेरी पत्नी ने और मैंने दोनों ने एक-एक बच्चे को केएमसी दी और उनका उपचार किया गया। अब उनके दोनों बच्चे स्वस्थ हैं।

एमएलजी राजकीय महिला अस्पताल में एसएनसीयू के नोडल ऑफिसर एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. किशोर कुमार माथुर बताते हैं कि हमारे यहां पर 14 बेड का एसएनसीयू है, यहां पर शून्य से 28 दिन तक के बच्चों को भर्ती करके उपचार किया जाता है। जनपद के अलग-अलग हिस्सों से (सीएचसी-पीएचसी) से रेफर होकर आने वाले बच्चों का यहां पर संपूर्ण उपचार किया जाता है। डॉ. किशोर कुमार माथुर ने बताया कि जनवरी 2025 से 18 फरवरी 2026 तक एसएनसीयू में 2322 बच्चे भर्ती हुए, जिनमें से 1700 बच्चे स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि हमारे यहां पर केएमसी (कंगारू मदर केयर यूनिट) की भी सुविधा है।

एमएलजी राजकीय महिला अस्पताल स्थित एसएनसीयू की इंचार्ज सिस्टर एलिस मोनिका बताती हैं कि यहां पर प्री-टर्म बच्चों सहित अन्य नवजात का उपचार किया जाता है। वह एक उदाहण देते हुए कहती हैं कि 31 दिसंबर को कासगंज से प्री-टर्म एक शिशु क्रिटिकल कंडीशन में रेफर होकर आया था, वजन काफी कम था, उसे केएमसी दिया जा रहा है। जब उसकी मां यहां पर नहीं आई थीं, तो कटोरी डोनर मां ( मां की अनुपस्थिति में दुग्धदान करने वाली मां) से दूध पिला रहे थे, अब मां आ गईं हैं तो स्तनपान करा रहे हैं, शिशु का वजन बढ़ गया और उसे डिस्चार्ज कर दिया है। नवजात अब पूरी तरह से स्वस्थ है।

एसएनसीयू पर बतौर काउंसलर कार्य कर रहीं डॉ. आयशा सिद्दीका अपना अनुभव साझा करते हुए बताती हैं कि एक बार एक मां अपने नवजात बच्चे को एसएनसीयू पर लेकर आईं और शिकायत की मेरा बच्चा बार-बार दूध पलट देता हैँ। हमने उस बच्चे की जांच की, जांच में उसे कोई चिकित्सकीय समस्या नहीं थी। इसके बाद मैंने नवजात को उसकी मां से सही तकनीक के साथ जब स्तनपान करवाया तो बच्चे ने दूध पी लिया और दूध उलटा भी नहीं। हम एसएनसीयू पर नवजात शिशुओं और उनके परिवार के बच्चों को हो रही किसी भी समस्या को लेकर शोध करते हैं और उनकी काउंसलिंग के जरिए परेशानी को दूर करने की कोशिश करते हैं। नवजात के डिस्चार्ज के समय भी हमारे द्वारा मां व परिवार के अन्य सदस्यों की काउंसलिंग की जाती है।

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वर्जन—
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीरज त्यागी ने बताया कि सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट उन नवजात शिशुओं के लिए वरदान साबित हो रहा है, जो जन्म के बाद गंभीर रोगों से पीड़ित होते हैं। अभी यहां पर 14 बेड की व्यवस्था है, इसे हम बढ़ाने के भी प्रयास कर रहे हैं।

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