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टीबी मुक्त भारत अभियान में आगरा का दमदार प्रदर्शन, यूपी में तीसरा स्थान हासिल
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नोटिफिकेशन में दूसरा स्थान, 47 ग्राम पंचायत टीबी मुक्त घोषित — स्वास्थ्य विभाग की लगातार मेहनत रंग लाई
आगरा | 23 मार्च 2026 | रिपोर्ट: अनीस सैफी
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत आगरा जनपद ने उत्तर प्रदेश में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान हासिल किया है। वहीं टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन के मामले में आगरा पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है, जो स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और जनभागीदारी का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता के अनुसार वर्ष 2025 में आगरा में कुल 30,518 टीबी मरीज चिन्हित किए गए, जिनमें 17,085 पुरुष और 13,421 महिलाएं शामिल हैं। इसके साथ ही जनपद की 47 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है, जो ग्रामीण स्तर पर जागरूकता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का संकेत है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 में 25,531, वर्ष 2024 में 29,837 और वर्ष 2025 में 30,356 टीबी मरीजों की पहचान की गई। वहीं वर्ष 2026 में अब तक 6,481 से अधिक मरीज चिन्हित किए जा चुके हैं। मरीजों की जल्द पहचान के लिए जिले में हाई रिस्क ग्रुप की स्क्रीनिंग, एक्स-रे जांच, घर-घर संपर्क और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि जनपद में 3,068 निक्षय मित्र टीबी मरीजों को भावनात्मक और पोषण सहयोग दे रहे हैं। जनवरी 2026 से अब तक 4,381 पोषण पोटली वितरित की जा चुकी हैं, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद मिल रही है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि टीबी उन्मूलन की राह में जागरूकता की कमी, सामाजिक झिझक और अधूरा इलाज अभी भी बड़ी चुनौतियां हैं। जनपद में 215 आयुष्मान आरोग्य मंदिर, 53 डेजिग्नेटेड माइक्रोस्कोपी सेंटर, 26 टीबी यूनिट, 44 पीएचआई और 30 अर्बन पीएचसी पर हर माह की 15 तारीख को ‘निक्षय दिवस’ मनाया जाता है, जिसमें टीबी की जांच, पहचान और उपचार सुनिश्चित किया जाता है।
सीएमओ ने बताया कि समय पर जांच और पूरा इलाज ही टीबी को खत्म करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
📌 बॉक्स न्यूज़ | जागरूकता से ही जीतेगी टीबी की जंग
विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर एसएन मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं चेस्ट विभाग द्वारा एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में करीब 500 लोगों को टीबी के लक्षण, उपचार और उससे जुड़े सामाजिक भ्रम के बारे में जानकारी दी गई।
श्वसन रोग विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) संतोष कुमार ने बताया कि टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो ट्युबरकुलोसिस बैक्टीरिया से होती है। यह मुख्यतः दो प्रकार की होती है — पल्मोनरी (फेफड़ों की टीबी) और एक्स्ट्रा पल्मोनरी (शरीर के अन्य अंगों की टीबी)। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल फेफड़ों की टीबी ही संक्रामक होती है और इसका इलाज पूरी तरह संभव है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि टीबी मरीजों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव न करें और लक्षण दिखाई देने पर जांच जरूर कराएं। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी का इलाज पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है।
TV92 न्यूज़ अपील:
टीबी एक गंभीर लेकिन पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है। समय पर जांच, पूरा इलाज और समाज की जागरूकता ही इसे खत्म कर सकती है। आइए, हम सब मिलकर टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करें।


